जम्मू और कश्मीर

पूर्ण राज्य की बहाली पर उमर अब्दुल्ला का केंद्र पर हमला, बोले- भीख नहीं अपना अधिकार मांग रहे

Kavita2
29 Sept 2026 10:49 AM IST
पूर्ण राज्य की बहाली पर उमर अब्दुल्ला का केंद्र पर हमला, बोले- भीख नहीं अपना अधिकार मांग रहे
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। विधानसभा में पूर्ण राज्य की बहाली से जुड़ा प्रस्ताव पारित होने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग कोई भीख नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अपना अधिकार मांग रहे हैं। उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने को आतंकवाद खत्म होने की शर्त से जोड़ने पर भी सवाल उठाए।

उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस देने का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि आतंकवाद पूरी तरह खत्म हुआ या नहीं, तो इसका मतलब होगा कि निर्णय की चाबी भारत के हाथ में नहीं रहेगी। उन्होंने सवाल किया कि यदि सीमा पार से आतंकवाद या हिंसा जारी रहती है तो क्या जम्मू-कश्मीर हमेशा राज्य के दर्जे से वंचित रहेगा। उन्होंने इसे पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक भविष्य पर प्रभाव देने जैसी स्थिति बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का दर्जा जम्मू-कश्मीर के लोगों का लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है। उनके मुताबिक इसे किसी बाहरी परिस्थिति या सुरक्षा संबंधी शर्त से जोड़ना सही नहीं होगा। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने को लेकर पहले किए गए वादों को पूरा किया जाए।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को पूर्ण राज्य की बहाली की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में पेश किया था। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और भाजपा विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भाजपा ने प्रस्ताव की भाषा और उसमें वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ पर आपत्ति जताई और बाद में सदन से वॉकआउट किया।

भाजपा का कहना है कि वह जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस देने के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे अनुच्छेद 370 या अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति की बहाली से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। भाजपा विधायकों ने स्पष्ट किया कि वे राज्य का दर्जा बहाल करने का समर्थन करते हैं, लेकिन विशेष दर्जे या पुराने स्वायत्तता ढांचे की वापसी से जुड़े किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे।

वहीं उमर अब्दुल्ला ने अपने जवाब में राज्य के दर्जे को लोगों के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जोड़ा। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार काम कर रही है। ऐसे में अब राज्य का दर्जा वापस देने की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।

उमर अब्दुल्ला लंबे समय से केंद्र सरकार को उसके पुराने आश्वासनों की याद दिलाते रहे हैं। विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राज्य का दर्जा बहाल किए जाने से जुड़े सार्वजनिक आश्वासनों का भी उल्लेख किया था। उनका कहना था कि यह कोई साधारण राजनीतिक मांग नहीं है, बल्कि केंद्र की ओर से जम्मू-कश्मीर की जनता से किया गया वादा है।

विधानसभा में प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान कई संशोधन भी पेश किए गए। इनमें कुछ संशोधन अगस्त 2019 से पहले की विशेष संवैधानिक स्थिति और अनुच्छेद 370 तथा 35ए जैसे मुद्दों से जुड़े थे। भाजपा ने इन्हीं संदर्भों पर सबसे अधिक आपत्ति जताई। हालांकि प्रस्ताव का मुख्य विषय जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग रहा।

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा अगस्त 2019 में समाप्त हुआ था। उस समय केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के तहत तत्कालीन राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया था। इसके बाद से पूर्ण राज्य की बहाली राज्य की प्रमुख राजनीतिक मांगों में शामिल है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस इस मुद्दे को लगातार उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि निर्वाचित सरकार होने के बावजूद केंद्रशासित प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकार उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के पास रहते हैं। इसी वजह से पार्टी पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से जरूरी बता रही है।

उमर अब्दुल्ला ने आतंकवाद और राज्य के दर्जे को जोड़ने वाले तर्क पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि सुरक्षा की स्थिति को बेहतर बनाना सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी क्षेत्र के लोकतांत्रिक अधिकारों को अनिश्चित अवधि तक सुरक्षा परिस्थितियों पर निर्भर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई पड़ोसी देश या आतंकवादी संगठन हिंसा जारी रखने में सफल रहता है तो क्या उसे अप्रत्यक्ष रूप से यह शक्ति मिल जानी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर को कब राज्य का दर्जा मिलेगा। इसी संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा इस्लामाबाद के व्यवहार से तय होगा।

दूसरी ओर भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य की सुरक्षा, आतंकवाद और स्थिरता जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा नेतृत्व ने पूर्ण राज्य की बहाली के सिद्धांत का विरोध नहीं किया, लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से प्रस्ताव में पुराने स्वायत्तता संदर्भ जोड़ने पर आपत्ति जताई है।

फिलहाल विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग ने एक बार फिर केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार इस मुद्दे को अधिकार के रूप में उठाती रहेगी, जबकि भाजपा ने राज्य का दर्जा और विशेष संवैधानिक प्रावधानों की बहाली को अलग-अलग मुद्दे बताया है।

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